पूजा की प्रकिर्या के तहत क्या क्या आता है ।
ध्यान - इसके अंतर्गत अपनी सभी इन्द्रियों को अपने अराध्य पर केन्द्रित किया जाता है ।
आहवान- अपने ध्यान के माध्यम से अराध्य को बुलाया जाता है।
आसन - अपने अराध्य को बैठने के लिए आसन दिया जाता है। इसके बाद अधर्य, आचमन, स्नान, पंचामृत चढ़ाना, पुष्प आदि समर्पित करना, वस्त्र समर्पित करना, यघ्योपवित, अक्षत समर्पित करना, धूप, अगरबत्ती आदि की खूशबू दिखाना, आभूषण समर्पित करना, प्रतिष्ठापना यानी अपने अराध्य की प्रतिमा एक जगह स्थापित करना और और प्रतिदिन उसकी पूजा करना, अपने अराध्य के नाम का स्मरण १०८ बार करना, दीप जलाना और नेवेध चढ़ाना, मंगल आरती करना, पूजा से सम्बन्धित मन्त्र आदि आते हैं, जो भक्त अपनी श्रद्धा के अनुरूप करता है।
आहवान- अपने ध्यान के माध्यम से अराध्य को बुलाया जाता है।
आसन - अपने अराध्य को बैठने के लिए आसन दिया जाता है। इसके बाद अधर्य, आचमन, स्नान, पंचामृत चढ़ाना, पुष्प आदि समर्पित करना, वस्त्र समर्पित करना, यघ्योपवित, अक्षत समर्पित करना, धूप, अगरबत्ती आदि की खूशबू दिखाना, आभूषण समर्पित करना, प्रतिष्ठापना यानी अपने अराध्य की प्रतिमा एक जगह स्थापित करना और और प्रतिदिन उसकी पूजा करना, अपने अराध्य के नाम का स्मरण १०८ बार करना, दीप जलाना और नेवेध चढ़ाना, मंगल आरती करना, पूजा से सम्बन्धित मन्त्र आदि आते हैं, जो भक्त अपनी श्रद्धा के अनुरूप करता है।
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