Friday, November 4, 2011

केसा भी दुःख हो तो

सनातन धर्म में गायत्री मंत्र महामंत्र माना गया है. धार्मिक दृष्टि से सृष्टि की रचना करने वाले ब्रह्मदेव को जगत की चेतना शिक्त के ह्वप में प्राप्त गायत्री मंत्र प्राणी जगत के लिए हर संकट का अंत करने वाला माना गया है. इस शिक्त को ब्रह्मदेव ने वेदों के माध्यम से प्राणियों तक पहुंचाया। गायत्री मंत्र वेद मंत्र है. माता गायत्री ही वह प्राणशिक्त है, जो गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों में समाई है. यह गुरु मंत्र भी कहा गया है. क्योंकि जिस तरह गुरु बुद्धि को शुद्ध और सात्विक बना जिंदगी को सही दिशा देता है। यही कार्य गायत्री मंत्र शिक्त से होता है. इसलिए गायत्री मंत्र जप बुद्धि, बल, ऊर्जा और स्वास्थ्य देने वाला माना गया है. इसका नियमित जप दु:खों और कष्टों से रक्षा करने वाला और पापों से मुक्त करने वाला माना गया है. धार्मिक महत्व की दृष्टि से गायत्री मंत्र दु:खों का नाश करने वाले ब्रह्म शिक्त का स्मरण है. अगर इसका एक बार भी जाप कर लिया जाए तो पूरे दिन के, सौ बार मंत्र जप कर ने पर पूरे माह के और एक हजार बार मंत्र जप से वर्षों के, एक लाख जप से जीवनभर के और एक करोड़ मंत्र जप से जन्म-जन्मान्तर के पाप नष्ट हो जाते हैं. शुक्रवार के दिन शिक्त उपासना प्रभावी मानी जाती है. इस दिन गायत्री उपासना मनोरथ पूर्ति भी करती है. जानते हैं गायत्री महामंत्र और जप की सरल विधि - - यथासंभव ब्रह्ममुहूर्त यानि सूर्योदय से पहले जागें. स्नान के साथ ही मंत्र जप में पूरी तरह से पवित्रता का ध्यान रखें.
- देवालय में माता गायत्री की पूजा गंध, अक्षत, पीले फूल चढ़ाकर करें। सुगंधित धूप और घी का दीप जलाकर पूरी आस्था और भिक्त से गायत्री मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें -
 
$र्भूभुव:स्व:तत्सवितुर्वरेण्यंभर्गोदेवस्यधीमहिधियोयोन:प्रचोदयात्।
 मंत्र जप के बाद माता गायत्री को यथाशिक्त प्रसाद का भोग लगाएं. माता गायत्री की आरती करें और मंत्र जप, आरती में हुई मन, उच्चारण और विचारों की त्रुटि के लिए क्षमा मांगे. जय जगदेव बाबा की

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